लखीमपुर खीरी में किताब का झांसा, मौत का फंदा: जब गुरु ने ही छात्रा को दरिंदों के हवाले कर दिया।

कलम से भविष्य लिखने वाले हाथों ने जब खंजर थाम लिया, तो इंसाफ की आखिरी उम्मीद FSL की लैब में जगी।



FSL रिपोर्ट ने खोला राज - वीडियो असली निकला,पिता की तहरीर में शिक्षक पर साजिश का आरोप। गैंगस्टर लगा।

लखीमपुर खीरी। जुलाई की तपती दोपहर थी। पिपरीनरायनपुर की 17 साल की पूजा तिवारी घर से निकली। हाथ में बस्ता, आंखों में सपने। मकसद था गोला से किताब खरीदना। साथ था वो शख्स जिसे समाज "गुरुजी" कहता है - उसके कॉलेज का शिक्षक,पूजा को क्या पता था कि जिस हाथ ने ब्लैकबोर्ड पर भविष्य लिखना था, वही हाथ आज उसकी किस्मत में मौत लिखने जा रहा है।

अध्याय 1: भरोसे का कत्ल

पिता की FIR कहती है: शिक्षक ने ही फोन कर पूजा को बुलाया था। "किताब दिला दूंगा बेटा, मेरे साथ चलो,लेकिन रास्ता गोला बाजार का नहीं,हैदराबाद थाना क्षेत्र के सुनसान गन्ने के खेत का था। वहां पहले से घात लगाए बैठे थे छितौनिया के दबंग। 

FIR का आरोप है: शिक्षक ने पूजा को देखते ही कदम पीछे खींच लिए,इशारा मिलते ही दबंगों ने पूजा को घेर लिया,फिर जो हुआ, वो इंसानियत को शर्मसार करने वाला था। पूरी बर्बरता कैमरे में कैद हुई।

अध्याय 2: चीख जो दब गई 

घर लौटी पूजा खामोश थी। टूट चुकी थी। वीडियो वायरल होने का डर, लोक-लाज का खौफ। उसी रात कमरे की कुंडी बंद हुई। सुबह जब दरवाजा टूटा, तो पूजा फंदे से झूल रही थी। 

कलम पकड़ने वाले हाथों ने मौत को गले लगा लिया।

अध्याय 3: FIR और फरेब

पिता दौड़े थाने तहरीर में नाम लिखाया ग्राम प्रधान अन्नूलाल वर्मा और उस शिक्षक का। आरोप लगा कि पुलिस ने केस दर्ज करने में देर की। प्रधान को बचाने की कोशिश हुई,जब मीडिया में हल्ला मचा, तब जाकर पुलिस जागी। सभी नामजदों पर गैंगस्टर एक्ट लगा।

अध्याय 4: झूठ बनाम FSL

इधर आरोपी पक्ष चिल्लाता रहा - "वीडियो फर्जी है, एडिटेड है।" अन्नूलाल के समर्थन में गांव में जुलूस निकले,नारे लगे - "प्रधान निर्दोष है।"पुलिस ने वीडियो को लखनऊ FSL भेजा। अगस्त में रिपोर्ट आई और सारा खेल पलट गया था।

SP अमित चंद्रा का बयान कहानी का क्लाइमेक्स बना: 

"FSL ने साफ कर दिया है - वीडियो 100% असली है। न आवाज बदली, न विजुअल। यह क्लिपिंग पूजा के साथ हुई बर्बरता का जीता-जागता सबूत है।"

अध्याय 5: सवाल जो जिंदा हैं 

आज सभी आरोपी जेल में हैं। केस कोर्ट में है। पर सवाल जिंदा हैं:

1. शिक्षक मौके पर था तो उसने पूजा को बचाया क्यों नहीं?  

2. क्या किताब का बहाना सिर्फ एक जाल था?  

3. जब गुरु ही विश्वासघात करे, तो बेटियां किसके भरोसे स्कूल जाएं?

पुलिस विवेचना कहती है - शिक्षक ने पद का दुरुपयोग किया। छात्रा का भरोसा तोड़कर उसे साजिश के तहत आरोपियों के हवाले किया।

अंतिम पंक्ति:

कहते हैं गुरु का दर्जा भगवान से ऊपर होता है। पर लखीमपुर की इस कहानी में गुरु ने भगवान नहीं, हैवान का साथ दिया। FSL की एक रिपोर्ट ने झूठ की दीवार गिरा दी। अब इंसाफ कोर्ट के पाले में है।

डिस्क्लेमर: यह आपराधिक कहानी पुलिस रिकॉर्ड, दर्ज FIR एवं SP द्वारा FSL रिपोर्ट की पुष्टि पर आधारित है। प्रकरण माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। किसी को दोषी घोषित करना न्यायालय का अधिकार है।

लेखक: प्रांशु वर्मा KHERI LIVE TV क्राइम फ़ाइल्स 


Comments

Popular posts from this blog

गुजरात में पकड़े गए संदिग्ध आतंकी सुहेल के घर का हाल, परिवार को नहीं आरोपों पर यकीन

डरें न बिटिया डटकर करें मुकाबला हर चौक चौराहे पर हम मुस्तैद हैं "उप निरीक्षक जितेंद्र पाल सिंह"