अपराध और खीरी जिले की जनता का पुलिस से सवाल।


लखीमपुर खीरी जिले में पिछले कई दिनों से ताबड़तोड़ वारदातें से आंकलन  स्वयं कर सकते हैं,अब भय का माहौल कायम है,कई घटित वारदातों से सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लगता है, खीरी में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है और अपराधी बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं। सड़क पर सरेआम गोलियां चलाने से लेकर रोडरेज जैसी घटनाओं हों या छोटी-छोटी बातों पर जान ले लेनी की घटनाएं, आपराधिक तत्वों के भीतर पुलिस और कानून का कोई भय खत्म हो गया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे? खासतौर से बुजुर्गों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? हाल में लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ क्षेत्र से सनसनीखेज वारदात सामने आई गांव भैंठिया में विगत बुधवार को दिनदहाड़े एक युवक की हत्या कर दी गई,पड़ोसी दोस्त ने पहले उसे शराब पिलाई, फिर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ प्रहार कर मार डाला,इससे पहले कोतवाली सदर के गांव मड़राही निवासी विष्णु अपनी पत्नी मानसी के साथ ससुराल में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए गया था। विगत 3 मार्च दिन सोमवार की शाम पांच बजे शादी निपटाने के बाद गांव वापस लौट रही थी। बताया जा रहा है कि ग्राम ढकवा स्थित बड़ी नहर के पास पहुंचे ही थे कि तभी पीछे से दो बाइक सवार लुटेरे ने उसकी बाइक रोक ली,मामला समझ में आता इससे पहले ही गोली मार देने की धमकी देते हुए कान के दोनों सोने के बालियां और गले से सोने का माला लूट ली। घटना के बाद महिला ने मदद मांगी तो राहगीरों ने एक बदमाश को दबोच लिया, जबकि उसका दूसरा साथी मौके पाकर भाग निकला। गुस्साए लोगों ने पकड़े गए आरोपी शिवम मिश्रा निवासी मरखापुर थाना खीरी की जमकर पिटाई की,पूछताछ के दौरान दूसरे साथी का नाम राजन सिंह निवासी मरखापुर बताया.

गला घोटकर हुई थी किशोर की हत्या

भीरा थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत रड़ा देवरिया के मजरा नई बस्ती में शनिवार को मचान पर मिले किशोर की हत्या गला दबाकर की गई थी। इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई,रड़ा देवरिया के मजरा नई बस्ती निवासी अशोक कुमार के 14 वर्षीय पुत्र सोहिल का शव शनिवार को गांव के एक खेत में मचान पर मिला था। पोस्टमॉर्टम के बाद रविवार शाम शव घर पहुंचा तो परिवार के लोग हत्या का मुकदमा दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। शनिवार की रात ही भीरा एसओ पुष्पराज कुशवाहा और कई थानों की पुलिस और क्षेत्राधिकारी गोला गवेंद्र गौतम, एडिशनल एसपी नैपाल सिंह मौके पर पहुंच गए,शव के अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस और मृतक के परिजनों में लगातार वार्ता चलती रही। रविवार की सुबह एक प्लाटून पीएसी भी बुला ली गई। रड़ा तथा नई बस्ती छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस अधिकारियों के समझाने पर और अज्ञात के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज करने के आश्वासन पर परिवार वालों ने शव का अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने की बात पुलिस के सामने रख दी। हालांकि पुलिस रड़ा में ही कैंप कर रही है। कई टीमें खुलासे में लगी हुई हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी, मवेशियों की चोरी,हत्याएं,जैसे वारदातों को रोकने के लिए खीरी जिले की हाईटेक पुलिस ने गुड मॉर्निंग अभियान समेत बाकायदा अपना एक तंत्र भी बनाया लेकिन ऐसा तंत्र किस काम का जो सुरक्षा न दे पाए और जब कत्ल हो जाए तो इधर-उधर की खाक छानता रहे! जाहिर है, अपराधी ज्यादा शातिर साबित हो रहे हैं और पुलिस के प्रयास उनके सामने बौने पड़ रहे हैं। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि पहले के मुकाबले जनता की सुरक्षा की दिशा में पुलिस ने कुछ प्रयास तो शुरू किए हैं,बीट कांस्टेबल, थानाध्यक्ष, सहायक पुलिस आयुक्त जैसे अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं,अकेले रह रहे बुजुर्गों, व अन्य लोगों का बड़ा डाटाबेस तैयार किया गया है, लेकिन अगर हम जनता को सुरक्षा दे ही नहीं पा रहे तो फिर ये सारी कवायदें बेकार हैं हकीकत तो यह है कि पुलिस को जिस तरह इस संवेदनशील मसले पर ध्यान देना चाहिए, वह नहीं देती। काम के दबाव का बहाना बना दिया जाता है। समस्या यह है जब अपराधी वारदात को अंजाम दे जाते हैं उसके बाद ही सारा तंत्र हरकत में आता है।


दूसरी बड़ी बात यह है कि ज्यादातर रिहायशी इलाकों और स्कूलों आने जाने में सुरक्षा के बंदोबस्त पुख्ता नहीं है। जैसे कि नीमगांव थाना क्षेत्र के में परीक्षा देकर लौट रहे छात्र एर फायरिंग की गई,उसकी सुरक्षा संबंधी खामियां अब सामने आ रही हैं। यह हाल ज्यादातर नीमगांव का है। आपराधिक तत्व इसका भरपूर फायदा उठाते हैं। हालांकि अब कई जगह सीसीटीवी कैमरे लगने से अपराधियों तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान तो गया है और कई हत्याओं के मामले सुलझे भी हैं। लखीमपुर खीरी जिले में ज्यादातर परिवार ऐसे हैं जिनमें बुजुर्ग ही घर पे हैं और बच्चे अपने परिवारों के साथ अलग,कइयों के बच्चे विदेश में रहते हैं,ऐसे में बुजुर्गों की सुरक्षा स्थानीय पुलिस आदि पर ही निर्भर है।

समस्या यह है कि जैसा मजबूत निगरानी तंत्र होना चाहिए, वह है नहीं इसीलिए अपराधी बेलगाम हैं!

Comments